अगर मोदी जी ने सत्ता में आते हि भारत के रुपए का पुनर्मूल्यांकन कुछ इस तरह किया होता तो क्या होता।

मौजूदा भाव 1 डालर 68 रुपए धोषणा हम रुपए का पुनर्मूल्यांकन करेंगे

धोषणा होते ही क्या होगा ?

1 जो विदेश से समान खरीदते हैं वो रूक जायेंगे। कि कल को सस्ता मिलेगा क्यूंकि विदेशी करेंसी कम कीमत में होगी तो कम पैसे जायेंगे .

2 जो विदेश में कच्चा माल बेचते हैं वो भी रुक जायेंगे कि 65 रुपये का माल अभी बेचा तो 1 डालर मिलेगा और जब डॉलर को रूपये में बदलवाने जायेंगे तो मिलेगा सिर्फ 1 रुपया इसलिए 65 रूपये का माल 65 डॉलर में ही बेचेंगे, कल को 1 डालर अगर 1 रुपए का हुआ तो 65 रुपये मिलेंगे । वो भी रुकेगा । यहाँ एक बात याद रहे भारत विश्व का बाज़ार है, खरीददार है..विश्व भारत में बेचने के सपने देखता है, और हमारे मुर्ख लोग महंगी करेंसी पाने के लिए, देश के कीमती चीजो को सस्ते दामों में विदेशियों को बेचकर देश की आर्थिक नुक्सान करते हैं.. (आपको लगता होगा की ये लोग देश को आर्थिक फायदा करवा रहे हैं). इन चंद लोगों के फायदे के लिए पुरे देश की करेंच्य गिरवी रखकर देश के संसाधनों की लूट हो रही है..

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As we become less-cash society, fight against black money needs to withdraw high denomination notes.By the end of this month, the window for disclosing black money will close. This is the income declaration scheme (IDS) of the income tax department. It is an amnesty scheme, in that no criminal charges will be brought against the voluntary disclosures. The information will be kept confidential and no future penal action will result from this disclosure.

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It's a known fact that India's salaried class single-handedly contributes to the country's income tax base. But now a new study has found that Indians are among the most taxed in the world.

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मोदी सरकार जब से केंद्र में आई है तब से ही उन्होंने arthakranti टैक्स व्यवस्था की ओर कदम बढ़ने शुरू कर दिए थे..आज भी एक और कदम उस ओर बढाया गया जिसके लिए हम केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी जी के आभारी हैं. अभी तक के उठाये गए कदम इस प्रकार हैं.

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A presentation made last week for a sub-group of Secretaries set up by Prime Minister Narendra Modi seeks to abolish income tax and over 30 local, State and Central taxes. The proposal from a Pune-based tax research outfit, Arthakranti, advocates replacing the present tax system with a single 2 per cent levy per receipt in bank accounts and recommends that just import duties be retained from the present system.

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