विश्‍लेषण

भारतको अनेक समस्‍याओंका सामना कर पड रहा है| उनमेसे कई प्रश्‍न मूलभूत और रोजमर्रा जिंदगीके साथ जुडे हुये है| दुर्भाग्यसे समांतर अर्थव्‍यवस्‍था, भ्रष्‍टाचार और दुर्बल शासनव्‍यवस्‍था इन महाकाय कठीनाईयोंके होते हुये सरकार, प्रशासनयंत्रणा और गैर-सरकारी संघटनोंके अच्‍छे प्रयासोंके बावजूद इन समस्‍याओंको सुलझानेके प्रयत्‍न नाकाम साबित होते है| उदाहरणके लिए अशिक्षितता, बाल मजदूरी इन प्रश्‍नोंको सुलझानेमे गरीबीकी रुकावट आती है और जब हम गरीबी हटानेके प्रयत्‍न करते है, तो भ्रष्‍टाचार, खोखले आधारभूत ढॉंचेका अटकाव होता है| सब सामाजिक आर्थिक प्रश्‍न आपसमे इतने जुडे हुये है की इनमेसे कोई एक समस्‍याका अलगसे सुलझाना बेकार हो जाता है| हम उस समस्‍याके साथ जीते है या उससे अपना तालमेल बिठानेकी कोशिश करते है|

इसलिए ये जरुरी है की हमे सर्वसमावेशक और गहराईके स्‍तरपर सोचना पडेगा, जिससे परिणामकारी उंचे स्‍तरके लाभ मिलेंगे| देशमे पनप रहे आजके सामाजिक-आर्थिक दुष्‍टचक्रको तोडनेमे इन उत्तरोंकी मद्द होनी चाहिये. जिससे बेहतर कलकी बुनियाद ढाल सके| जिधर हर व्‍यक्‍तीको शांती और आत्‍मसन्‍मानका साक्षात्‍कार हो|

अर्थक्रांती प्रस्‍तावकी रचना संशोधन तथा गहरी सोचके बादही की गयी है| आजके सब सामाजिक-आर्थिक प्रश्‍नोंके जडतक जाकर सटीक कारणोंका विश्‍लेषण किया गया है| इन मूल कारणोंके पीछे तकनीकी कमीयोंका चित्र सामनो उभरकर आया है| इसलीए इसका सीधा उत्तर है-हमारे आर्थिक व्‍यवस्‍थाके नियंत्रणमे एक तकनिकी दुरुस्‍त इस प्रस्‍तावके लागू होनेसे, करकी चोरी करनेके, लाभोंसे ज्‍यादा लाभ कर देनेसे मिलेंगे| अर्थक्रांती प्रस्‍ताव लागू करनेकेबाद आजकी बहुत सारी सामाजिक-आर्थिक समस्‍याओंसे छुटकारा पानेमे मद्द मिलेगी और हम सब एक शांतीपूर्ण, समृद्ध और आत्‍मसन्‍मानका जीवन जियेंगे हे हमारा विश्‍वास है|

अर्थक्रांती-विश्‍लेषण सामाजिक सच्चाई के जरिये इस प्रकार सादर है

  • आर्थिक सच्‍चाई
  • कमजोर बँक-प्रणाली
  • आजकी सदोष कर-व्‍यवस्‍था